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Climate Change Legislation

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Climate change legislation से तात्पर्य Climate change के प्रभावों को कम करने और उसके अनुकूल होने के लिए सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों और विनियमों से है। हाल ही में Climate change legislation के कुछ प्रमुख पहलू और उदाहरण इस प्रकार हैं:

1. पेरिस समझौता (2015): एक अंतरराष्ट्रीय संधि जिसमें देशों ने ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से भी कम पर सीमित करने की प्रतिबद्धता जताई है, साथ ही इसे 1.5 डिग्री तक सीमित करने का प्रयास किया है। देशों को अपनी जलवायु कार्य योजनाओं की रूपरेखा तैयार करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) प्रस्तुत करना होगा।

2. यूरोपीय ग्रीन डील: 2050 तक यूरोप को जलवायु-तटस्थ बनाने के लिए यूरोपीय संघ की व्यापक योजना। इसमें यूरोपीय जलवायु कानून शामिल है, जो कानूनी रूप से यूरोपीय संघ को इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बाध्य करता है, और इसमें ऊर्जा, परिवहन, कृषि और उद्योग पर विभिन्न नीतियाँ शामिल हैं।

3. मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम (2022, यूएसए): इस अधिनियम में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य जलवायु-संबंधी पहलों में महत्वपूर्ण निवेश शामिल हैं। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देकर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।

4. जलवायु कार्रवाई और कम कार्बन विकास अधिनियम (2015, आयरलैंड): यह कानून आयरलैंड की कम कार्बन विकास रणनीति निर्धारित करता है, जिसका लक्ष्य 2050 तक जलवायु-लचीला और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करना है।

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5. जलवायु परिवर्तन अधिनियम (2008, यूके): यूके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी रूपरेखा अपनाने वाले पहले देशों में से एक था। अधिनियम 2050 तक उत्सर्जन में 80% की कमी (अब शुद्ध-शून्य तक बढ़ा) का लक्ष्य निर्धारित करता है।

6. जर्मनी का जलवायु संरक्षण अधिनियम (2019): यह कानून 1990 के स्तर की तुलना में 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कम से कम 55% की कमी को अनिवार्य करता है, जिसमें क्षेत्र-विशिष्ट लक्ष्य और प्रगति की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ परिषद शामिल है।

7. कनाडा का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन जवाबदेही अधिनियम (2021): यह अधिनियम कनाडा को 2050 तक शुद्ध-शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध करता है और पाँच साल के अंतराल पर अंतरिम उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य निर्धारित करने की प्रक्रिया स्थापित करता है।

8. जापान का जलवायु परिवर्तन अनुकूलन अधिनियम (2018): यह कानून जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन उपायों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसके लिए स्थानीय सरकारों और व्यवसायों को अनुकूलन योजनाओं को विकसित करने और लागू करने की आवश्यकता होती है।

9. न्यूजीलैंड का जलवायु परिवर्तन प्रतिक्रिया (शून्य कार्बन) संशोधन अधिनियम (2019): यह अधिनियम 2050 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित करता है, एक स्वतंत्र जलवायु परिवर्तन आयोग की स्थापना करता है, और सरकार को उत्सर्जन में कमी की योजनाएँ विकसित करने और लागू करने की आवश्यकता होती है।

10. ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय हाइड्रोजन रणनीति (2019): हालाँकि यह पूरी तरह से जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित नहीं है, लेकिन इस रणनीति का उद्देश्य उत्सर्जन को कम करने और कम कार्बन अर्थव्यवस्था में संक्रमण के लिए हाइड्रोजन उद्योग विकसित करना है।

भारत में Climate change के लिए क्या कानून है?

(1) इस अधिनियम को जलवायु परिवर्तन परिषद अधिनियम, 2021 कहा जा सकता है।
(2) यह पूरे भारत पर लागू है।
(3) यह उस तिथि को लागू होगा जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्धारित करेगी।

Climate change legislation जलवायु के सुधार में किस तरह से बदलाव लाता है?

Climate change legislation में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करके और संधारणीय प्रथाओं को बढ़ावा देकर जलवायु को प्रभावित करने की क्षमता है। जबकि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली की जटिलता और जड़ता के कारण वैश्विक जलवायु पर प्रत्यक्ष प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं दे सकता है, ऐसे कई संकेतक हैं जो बताते हैं कि इस तरह के कानून समय के साथ बदलाव ला सकते हैं:

1. उत्सर्जन में कमी: यूरोपीय संघ और कुछ अमेरिकी राज्यों जैसे कठोर जलवायु नीतियों वाले देशों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ के उत्सर्जन में 2019 तक 1990 के स्तर से लगभग 24% की कमी आई है, आंशिक रूप से नियामक उपायों के कारण।

2. नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने वाले कानून ने पवन, सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में पर्याप्त वृद्धि की है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

3. ऊर्जा दक्षता: इमारतों, वाहनों और उपकरणों में ऊर्जा दक्षता को अनिवार्य करने वाली नीतियों ने ऊर्जा की खपत और उत्सर्जन को कम किया है।

4. अंतर्राष्ट्रीय समझौते: पेरिस समझौते जैसे वैश्विक प्रयासों का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित करना है। भाग लेने वाले देशों ने राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिससे कम कार्बन प्रौद्योगिकियों में सहयोगात्मक प्रयास और निवेश हो रहे हैं।

5. आर्थिक बदलाव: कानून हरित उद्योगों की ओर आर्थिक बदलाव ला सकता है, बाजारों को प्रभावित कर सकता है और संधारणीय प्रौद्योगिकियों में नवाचार को प्रोत्साहित कर सकता है। हालाँकि, जलवायु पर इन विधायी उपायों का पूरा प्रभाव केवल दीर्घ अवधि में ही स्पष्ट होगा, क्योंकि वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर और वैश्विक तापमान को स्थिर होने और कम उत्सर्जन का जवाब देने में दशकों लगते हैं।

Climate change को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति करने के लिए निरंतर और तेजी से कड़े प्रयासों की आवश्यकता है। ये विधायी कार्य व्यापक और प्रवर्तनीय नीतियों के माध्यम से Climate change की समस्या से निपटने की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाते हैं।

Roshan Khamari
Roshan Khamarihttp://jungletak.in
Biographical Information - Roshan Khamari Name: Roshan Khamari Date of Birth: February 12, 2002 Place of Birth: Kalahandi District, Odisha, India Roshan Khamari is a dynamic and visionary individual with a passion for nature, wildlife, and journalism. Born on February 12, 2002, in the scenic landscapes of Kalahandi district in Odisha, India, Roshan's upbringing in the midst of lush forests and vibrant wildlife fostered a deep connection with the natural world from a young age. Driven by his love for nature and wildlife conservation, Roshan embarked on a dual educational journey, pursuing both a BA in Journalism and Mass Communication and a BSc in Forestry, Wildlife, and Environmental Science simultaneously. This unique combination reflects his commitment to raising awareness about environmental issues and using journalism as a powerful tool to amplify nature's voice. As a young and enthusiastic advocate for the environment, Roshan's passion led him to found Jungle Tak, India's first forest-based news platform. Through Jungle Tak, Roshan endeavors to bring people closer to the wonders of the wild, inspiring a deeper appreciation for nature's beauty and fostering a sense of responsibility towards conservation. With an academic background in journalism and forestry, wildlife, and environmental science, Roshan strives to use his knowledge and platform to educate, engage, and empower others in the realm of nature and wildlife conservation. As he continues on his journey to make a positive impact on the environment, Roshan's dedication, vision, and unwavering commitment to preserving the beauty of our planet's wilderness serve as an inspiration to all. Biographical Information updated as of August2023

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