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पूर्वी सिक्किम में हिमालयी स्तनधारियों के 11 महत्वपूर्ण रिकॉर्ड, 3,542 मीटर की ऊंचाई पर मिला गौर; लगभग 4,000 मीटर पर बाघ की मौजूदगी दर्ज

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गंगटोक, सिक्किम: पूर्वी हिमालय के ऊंचे पर्वतीय जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। पूर्वी सिक्किम में हिमालयी स्तनधारी प्रजातियों के वितरण पर किए गए नए शोध में वैज्ञानिकों ने 11 उल्लेखनीय रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। इनमें पांच नए ऊंचाई संबंधी रिकॉर्ड और छह पहली बार प्राप्त फोटोग्राफिक रिकॉर्ड शामिल हैं। शोध के दौरान 3,542 मीटर की ऊंचाई पर गौर और 3,966 मीटर पर बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई। ये निष्कर्ष पूर्वी हिमालय की जैव विविधता और ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को नए सिरे से सामने लाते हैं।

यह शोध Journal of Threatened Taxa में 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ। शोधपत्र का शीर्षक ‘New Elevational Limits of Himalayan Mammals in Eastern Sikkim, India’ है। इसके लेखक पूजा पंत, गौरव सोनकर, अनुज जोशी, मुकेश कुमार, विनीत कुमार दुबे, गोविंदन वीरास्वामी गोपी और संबंदम सत्यकुमार हैं। पूर्वी सिक्किम में हिमालयी स्तनधारी प्रजातियों पर यह अध्ययन उनके प्राकृतिक आवास और भौगोलिक वितरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करता है।

64 कैमरा ट्रैप स्टेशनों से सामने आए वन्यजीवों के नए रिकॉर्ड

शोधकर्ताओं ने फरवरी 2023 से मई 2026 के बीच पूर्वी सिक्किम के संरक्षित क्षेत्रों और उनसे लगे गैर-संरक्षित वन क्षेत्रों में अध्ययन किया। इसके लिए 1,800 से 4,200 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 64 कैमरा ट्रैप स्टेशन लगाए गए। पूरे सर्वेक्षण के दौरान कुल 20,411 कैमरा ट्रैप नाइट्स का प्रयास दर्ज किया गया। इस व्यापक निगरानी में स्तनधारियों की 30 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज हुई। इनमें से 11 रिकॉर्ड विशेष रूप से उल्लेखनीय पाए गए। यह अध्ययन बताता है कि व्यवस्थित कैमरा ट्रैप निगरानी से उन क्षेत्रों में भी वन्यजीवों की उपस्थिति सामने आ सकती है, जहां नियमित प्रत्यक्ष अवलोकन कठिन होता है।

3,542 मीटर पर गौर की मौजूदगी, वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण रिकॉर्ड

इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक गौर (Bos gaurus) की उपस्थिति है। शोधकर्ताओं ने पांगोलखा वन्यजीव अभयारण्य में 3,542 मीटर की ऊंचाई पर गौर की तस्वीर दर्ज की। शोधपत्र के अनुसार, यह विश्व स्तर पर गौर का सबसे ऊंचा सत्यापित फोटोग्राफिक रिकॉर्ड है। सामान्यतः गौर को अपेक्षाकृत निचले वन क्षेत्रों से जोड़ा जाता है, लेकिन पूर्वी सिक्किम में प्राप्त यह रिकॉर्ड इसकी ऊंचाई संबंधी वितरण सीमा को समझने के लिए नया वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।

3,966 मीटर की ऊंचाई पर बाघ की मौजूदगी

अध्ययन का एक अन्य उल्लेखनीय निष्कर्ष क्योनगनोसला क्षेत्र में 3,966 मीटर की ऊंचाई पर बाघ (Panthera tigris) की मौजूदगी का दर्ज होना है। यह हिमालयी क्षेत्रों में बाघ की सबसे अधिक ऊंचाई पर दर्ज उपस्थिति के महत्वपूर्ण रिकॉर्डों में से एक है। इतनी ऊंचाई पर बाघ की तस्वीर मिलना इस बात को रेखांकित करता है कि बड़े मांसाहारी वन्यजीवों की आवास संबंधी आवश्यकताओं और उनकी आवाजाही को समझने के लिए ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में भी नियमित निगरानी जरूरी है।

रेड पांडा से क्लाउडेड लेपर्ड तक, कई प्रजातियों के महत्वपूर्ण अवलोकन

शोध में रेड पांडा (Ailurus fulgens) और गोल्डन जैकल (Canis aureus) दोनों की मौजूदगी 4,100 मीटर की ऊंचाई पर दर्ज की गई। इसके अलावा सांभर (Rusa unicolor) को 3,050 मीटर, स्पॉटेड लिंसांग (Prionodon pardicolor) को 2,939 मीटर और क्लाउडेड लेपर्ड (Neofelis nebulosa) को 3,189 मीटर की ऊंचाई पर दर्ज किया गया। इन अवलोकनों से स्पष्ट होता है कि पूर्वी सिक्किम में हिमालयी स्तनधारी प्रजातियां अलग-अलग ऊंचाई वाले आवासों में मौजूद हैं और इस क्षेत्र की जैव विविधता वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पूर्वी हिमालय में वन्यजीव संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?

पूर्वी सिक्किम के जंगल भारत, भूटान और तिब्बत से जुड़े व्यापक हिमालयी पारिस्थितिकी परिदृश्य का हिस्सा हैं। शोध में संरक्षित क्षेत्रों के साथ आसपास के गैर-संरक्षित वन क्षेत्रों के महत्व पर भी ध्यान दिया गया है। ऐसे वन्य क्षेत्र कई प्रजातियों की आवाजाही, आवास की निरंतरता और पारिस्थितिक संपर्क बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बदलती जलवायु, मानवीय गतिविधियों और आवास विखंडन के बीच इन क्षेत्रों की नियमित निगरानी आवश्यक है।

यह अध्ययन बताता है कि कैमरा ट्रैप तकनीक केवल प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि वन्यजीवों के भौगोलिक वितरण और उनके आवास संबंधी व्यवहार को समझने का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण भी है। पूर्वी सिक्किम में हिमालयी स्तनधारी प्रजातियों से जुड़े ये नए रिकॉर्ड भविष्य में संरक्षण योजनाओं, आवास प्रबंधन और सीमापार वन्यजीव संरक्षण के लिए उपयोगी आधार बन सकते हैं।

निष्कर्ष: हिमालय के जंगलों में अभी भी छिपे हैं जैव विविधता के कई रहस्य

पूर्वी सिक्किम में किए गए इस अध्ययन ने हिमालयी वन्यजीवों के बारे में वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाया है। गौर का 3,542 मीटर पर और बाघ का 3,966 मीटर पर दर्ज होना, साथ ही रेड पांडा और गोल्डन जैकल की 4,100 मीटर पर मौजूदगी, इस पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती है। शोध के निष्कर्ष स्पष्ट करते हैं कि हिमालयी जैव विविधता की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक निगरानी, वन आवासों की निरंतरता और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

शोध प्रकाशन का विवरण

शोधपत्र: New Elevational Limits of Himalayan Mammals in Eastern Sikkim, India
पत्रिका: Journal of Threatened Taxa
प्रकाशन तिथि: 26 अक्टूबर 2026
खंड: 18, अंक 10
पृष्ठ: 29900–29906
शोधकर्ता: पूजा पंत, गौरव सोनकर, अनुज जोशी, मुकेश कुमार, विनीत कुमार दुबे, गोविंदन वीरास्वामी गोपी एवं संबंदम सत्यकुमार।

मूल शोधपत्र पढ़ें: पूरा वैज्ञानिक शोध और उसके निष्कर्ष यहां पढ़ें।

Roshan Khamari
Roshan Khamarihttp://jungletak.in
Biographical Information - Roshan Khamari Name: Roshan Khamari Date of Birth: February 12, 2002 Place of Birth: Kalahandi District, Odisha, India Roshan Khamari is a dynamic and visionary individual with a passion for nature, wildlife, and journalism. Born on February 12, 2002, in the scenic landscapes of Kalahandi district in Odisha, India, Roshan's upbringing in the midst of lush forests and vibrant wildlife fostered a deep connection with the natural world from a young age. Driven by his love for nature and wildlife conservation, Roshan embarked on a dual educational journey, pursuing both a BA in Journalism and Mass Communication and a BSc in Forestry, Wildlife, and Environmental Science simultaneously. This unique combination reflects his commitment to raising awareness about environmental issues and using journalism as a powerful tool to amplify nature's voice. As a young and enthusiastic advocate for the environment, Roshan's passion led him to found Jungle Tak, India's first forest-based news platform. Through Jungle Tak, Roshan endeavors to bring people closer to the wonders of the wild, inspiring a deeper appreciation for nature's beauty and fostering a sense of responsibility towards conservation. With an academic background in journalism and forestry, wildlife, and environmental science, Roshan strives to use his knowledge and platform to educate, engage, and empower others in the realm of nature and wildlife conservation. As he continues on his journey to make a positive impact on the environment, Roshan's dedication, vision, and unwavering commitment to preserving the beauty of our planet's wilderness serve as an inspiration to all. Biographical Information updated as of August2023

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