Junnar में मानिकदोह लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर अभी बहुत ज़्यादा भीड़ की समस्या से जूझ रहा है। सिर्फ़ 45 तेंदुओं को रखने के लिए बनाया गया यह सेंटर अब 113 बड़ी बिल्लियों को रख रहा है, जो इसकी तय क्षमता से दोगुनी से भी ज़्यादा है। इस खतरनाक स्थिति ने अधिकारियों को असहज समझौते करने पर मजबूर कर दिया है — जिसमें दो बड़े तेंदुओं को 250 sq. m के बाड़े में एक साथ रखना शामिल है, यह एक ऐसा तरीका है जो वाइल्डलाइफ़ सुरक्षा और भलाई के लिए केंद्र की गाइडलाइंस का उल्लंघन करता है।
READ MORE: Tiger Captured at Nearly 10,000 ft in…
जंगल के अधिकारी ऐसे उपायों के पीछे जगह की बड़ी कमी को वजह बताते हैं, लेकिन कंज़र्वेशनिस्ट चेतावनी देते हैं कि इससे बड़ी बिल्लियों में ज़्यादा तनाव, इलाके का टकराव, सेहत से समझौता और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इस इलाके में इंसान-जानवर टकराव के बढ़ते मामलों से इस सेंटर पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, बेहतर रिहैबिलिटेशन पॉलिसी और लंबे समय तक चलने वाली कंज़र्वेशन प्लानिंग की तुरंत ज़रूरत है।
जुन्नार की स्थिति न सिर्फ़ एक लॉजिस्टिक चुनौती बल्कि एक बड़ी पर्यावरण की दुविधा को भी दिखाती है — उन इलाकों में वाइल्डलाइफ़ और समुदायों दोनों की सुरक्षा कैसे की जाए जहां उनके रास्ते तेज़ी से मिलते हैं।


