Coimbatore के सिरुमुगई वन क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। वन अधिकारियों का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे एक Wild Tusker, जिसे प्यार से बाहुबली भी कहा जाता है, को जीप से टक्कर मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में जीप हाथी के दाहिने पिछले पैर से टकराती हुई दिखाई दे रही है, जिससे भयभीत हाथी जंगल में भाग जाता है।
क्या हुआ:
यह घटना शनिवार रात को हुई जब हाथी मेट्टुपालयम के पास वन महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान परिसर में घुस आया। वन अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में ऐसा किया और आरोप लगाया कि हाथी ने पास में खड़े उनके एक वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
हालांकि, कार्यकर्ता और नागरिक इसे क्रूरता और लापरवाही का कृत्य बता रहे हैं। गैर-सरकारी संगठन पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (पीएफसीआई) ने इस घटना की निंदा की और निम्नलिखित के तहत कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की:
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
भारतीय न्याय संहिता, 2023
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कार्यकर्ताओं की आवाज़:
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि बाहुबली, जो आस-पास के गाँवों में शांतिपूर्वक विचरण करने के लिए जाना जाता है, का पहले कभी कोई आक्रामक व्यवहार नहीं रहा है।
मेट्टुपालयम के एक कार्यकर्ता एस. बाशा ने कहा, “इस तरह की लापरवाही और हाई-बीम लाइटों के इस्तेमाल से हाथी को आघात पहुँच सकता है और मानव-हाथी संघर्ष बढ़ सकता है।”
उन्होंने वन विभाग से आग्रह किया है कि वह यह जाँच करे कि हाथी घायल हुआ है या नहीं और ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता प्रदान करे।
अधिकारियों का बचाव:
वन रेंजर के. मनोज ने जानबूझकर ऐसा करने से इनकार किया और कहा कि वाहन ने हाथी को जंगल में वापस ले जाने के प्रयास में गलती से उसे टक्कर मार दी।
उन्होंने कहा, “यह कोई पूर्वनियोजित कृत्य नहीं था। हाथी ने रास्ता रोक दिया था और वाहन को सुरक्षा के लिए दूसरी जगह लगा दिया गया था। कोई नुकसान नहीं हुआ।”
जन आक्रोश और कानूनी निहितार्थ:
इस वीडियो की ऑनलाइन निंदा की लहर दौड़ गई है, जिसमें वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण समूहों ने जवाबदेही की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनुसूची I की संरक्षित प्रजाति, जंगली हाथी को किसी भी प्रकार का परेशान करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
यह क्यों मायने रखता है:
तमिलनाडु के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष एक बढ़ता हुआ मुद्दा है। ऐसी घटनाएँ न केवल वन्यजीवों को खतरे में डालती हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों और वन अधिकारियों के बीच के कमज़ोर विश्वास को भी कम करती हैं। संरक्षणवादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जंगली जानवरों से मुठभेड़ से निपटने के लिए नैतिक प्रबंधन, उचित प्रशिक्षण और करुणा-आधारित प्रतिक्रिया आवश्यक है।


