Madras उच्च न्यायालय ने Coimbatore के निकट वन-आसन्न क्षेत्रों और अवैध खनन से बने परित्यक्त गड्ढों में ठोस अपशिष्ट डालने की बढ़ती प्रथा पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की एक विशेष खंडपीठ ने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह की प्रथाएँ न केवल अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि वन्यजीवों और मानव समुदायों को भी खतरे में डालती हैं।
अदालत ने कहा कि अवैज्ञानिक तरीके से कचरा डालने से जंगली सूअर और हाथी जैसे जानवर आकर्षित होते हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष को बढ़ावा मिलता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब थडगाम घाटी से एक जंगली हाथी को कचरा खाते हुए दिखाया गया है, जो खराब अपशिष्ट निपटान के गंभीर परिणामों को उजागर करता है।
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पीठ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अपशिष्ट प्रबंधन में वैज्ञानिक दिशानिर्देशों और कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए। इसने 10 अक्टूबर तक एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया।
इस मुद्दे पर पहले भी दुखद घटनाएँ हो चुकी हैं, जैसे कि इस साल की शुरुआत में मारुथमलाई की तलहटी में एक मादा हाथी की मौत, कथित तौर पर वन सीमा के पास फेंके गए प्लास्टिक और खाद्य अपशिष्ट को खाने के कारण हुई थी। स्थानीय समुदाय भी नहरों और जंगल के किनारों पर कचरा जलाने और फेंकने पर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप इस बात की याद दिलाता है कि अनियंत्रित कचरा निपटान न केवल पर्यावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि मानव बस्तियों और वन्यजीवों के बीच के नाजुक संतुलन को भी बिगाड़ता है।


