मध्य प्रदेश के Khargone Forest प्रभाग में एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ जंगल के एक हिस्से में 200 से ज़्यादा पक्षी मरे हुए पाए गए, जिससे वन्यजीव अधिकारियों और पर्यावरणविदों में गंभीर चिंताएँ पैदा हो गई हैं। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि खाने में ज़हर सबसे संभावित कारण है, जो खाने के स्रोतों में संभावित मिलावट या जानबूझकर ज़हर देने की ओर इशारा करता है।
वन अधिकारियों ने विस्तृत प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए शवों, मिट्टी और आस-पास के पानी के स्रोतों के नमूने इकट्ठा किए हैं। हालाँकि अभी तक सटीक ज़हर की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाएँ अवैध ज़हर देने की प्रथाओं का संकेत दे सकती हैं, जो अक्सर कीट नियंत्रण, शिकार के प्रयासों या जंगल की सीमाओं के पास कृषि रसायनों के दुरुपयोग से जुड़ी होती हैं।
READ MORE: Forest Staff Trained on Wildlife Laws Under…
अधिकारियों ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और जवाबदेही तय करने के लिए जाँच शुरू कर दी है। पर्यावरणविदों का कहना है कि बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत सिर्फ़ वन्यजीवों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर पारिस्थितिक खतरे का संकेत है, क्योंकि पक्षी जंगल के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस घटना ने रासायनिक उपयोग की कड़ी निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो तुरंत कानूनी कार्रवाई की माँग को फिर से तेज़ कर दिया है।
पक्षियों की रक्षा करने का मतलब है पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना – यह जाँच अब जंगल की सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


